26 January Republic Day Speech In Hindi 2017

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26 January Republic Day Speech In Hindi 2017

Aap sabhi jante ho ki gadtantar divas 26 January ko mania jata hai. 26th January 1950 ko humare desh bharat ka savidhan lagu hua tha is din ko hum 26 january Gadtantar divas ke rup me mnate hai.Is varsh hum bharat ka 67th  Gantantra Diwas mnayenge.  Gantantra Diwas hum sabhi ke liye bhot hi garvpurn anam smanye hai. Hmara desh Bharat azaad hua tha 15 August, 1947 ko. Na jaane kitne veero ko apne jaan qurban karni padi humein yeh azaadi dilwane ke liye. Azaadi ke baad zaroorat thi humein, apne desh ke savidhaan ki yani ke constitution ki. Or hamare desh Bharat ka savidhaan likhe Late Dr. Bhim Rao Ambedkar ji ne. Hmara ye savidhaan astitav mein aaya 26 January, 1950 ko. Is se pehle Bharat mein Government of India Act (1935) lagu tha. To hiss liye hum har saal 26th January ko Republic Day ke roop mein manaate hn. Yeh rashtriye tyohaar hamaare desh ke liye gorav ka parteek hai. Or yeh desh bhakti ki bhawna se juda hua hai…!!

26 January Republic Day Speech In Hindi 2017

Is din waise toh National Holiday declared h, par har school, college or sarkar offices mein Republic Day ko celebrate karte hain. Poore Bharat desh me Gantantra Divas harsho ullas se manaya jata h. Tarah Tarah ke rangarang karyakarm bhi aayojitki jaati h. Saare Bhaartiya naagrik desh ke mahan veron ko shradhanjali samarpit karte hain. Iske ilaava is parade mein NCC, Scout ke cadets, Police ki tukdiyaan or school students bhi bhag lete hain. Har pardesh ki bhavya jhankiyaan dikhayi jati h.
Or sarv-shreshth jhanki ko puruskaar bhi diya jata h. Yeh rashtriya tyohaar hamare desh ke liye ek mahatavporn din hai. Bharat ke pratham rastrapti Dr. Rajendra Prasad ne sabse pehla karya kaal sambhala tha. Tabse ab tak is Bharat desh me kai neeti or kaanoon ko mahatav diya gaya jise Bharat desh ke sarvadhik naagrik apnate h. Dhanyewad..

मातृभुमि के सम्मान एवं उसकी आजादी के लिये असंख्य वीरों ने अपने जीवन की आहूति दी थी। देशभक्तों
की गाथाओं से भारतीय इतिहास के पृष्ठ भरे हुए हैं। देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत हजारों की संख्या में भारत माता के वीर सपूतों ने, भारत को स्वतंत्रता दिलाने में अपना सर्वस्य न्योछावर कर दिया था। ऐसे ही महान देशभक्तों के त्याग और बलिदान के परिणाम स्वरूप हमारा देश, गणतान्त्रिक देश हो सका।

गणतन्त्र (गण+तंत्र) का अर्थ है, जनता के द्वारा जनता के लिये शासन। इस व्यवस्था को हम सभी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। वैसे तो भारत में सभी पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं, परन्तु गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते हैं। इस पर्व का महत्व इसलिये भी बढ जाता है क्योंकि इसे सभी जाति एवं वर्ग के लोग एक साथ मिलकर मनाते हैं।

गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं? मित्रों, जब अंग्रेज सरकार की मंशा भारत को एक स्वतंत्र उपनिवेश बनाने की नजर नही आ रही थी, तभी 26 जनवरी 1929 के लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरु जी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पूर्णस्वराज्य की शपथ ली। पूर्ण स्वराज के अभियान को पूरा करने के लिये सभी आंदोलन तेज कर दिये गये थे। सभी देशभकतों ने अपने-अपने तरीके से आजादी के लिये कमर कस ली थी। एकता में बल है, की भावना को चरितार्थ करती विचारधारा में अंग्रेजों को पिछे हटना पङा। अंतोगत्वा 1947 को भारत आजाद हुआ, तभी यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1929 की निर्णनायक तिथी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनायेंगे।

26 January Republic Day Speech In Hindi 2017

26 जनवरी, 1950 भारतीय इतिहास में इसलिये भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि भारत का संविधान, इसी दिन अस्तित्व मे आया और भारत वास्तव में एक संप्रभु देश बना। भारत का संविधान लिखित एवं सबसे बङा संविधान है। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में 2 वर्ष, 11 महिना, 18 दिन लगे थे। भारतीय संविधान के वास्तुकार, भारत रत्न से अलंकृत डॉ.भीमराव अम्बेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने विश्व के अनेक संविधानों के अच्छे लक्षणों को अपने संविधान में आत्मसात करने का प्रयास किया है। इस दिन भारत एक सम्पूर्ण गणतान्त्रिक देश बन गया।देश को गौरवशाली गणतन्त्र राष्ट्र बनाने में जिन देशभक्तो ने अपना बलिदान दिया उन्हे याद करके, भावांजली देने का पर्व है, 26 जनवरी।

मित्रो, भारत से व्यपार का इरादा लेकर अंग्रेज भारत आये थे, लेकिन धीरे -धीरे उन्होने यहाँ के राजाओं और सामंतो पर अपनी कूटनीति चालों से अधिकार कर लिया। आजादी कि पहली आग मंगल पांडे ने 1857 में कोलकता के पास बैरकपुर में जलाई थी, किन्तु कुछ संचार संसाधनो की कमी से ये आग ज्वाला न बन सकी परन्तु, इस आग की चिंगारी कभी बुझी न थी। लक्ष्मीबाई से इंदिरागाँधी तक, मंगल पांडे से सुभाष तक, नाना साहेब से सरदार पटेल तक, लाल(लाला लाजपत राय), बाल(बाल गंगाधर तिलक), पाल(विपिन्द्र चन्द्र पाल) हों या गोपाल, गाँधी, नेहरु सभी के ह्रदय में धधक रही थी। 13 अप्रैल 1919 की (जलिया वाला बाग) घटना, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे अधिक दुखदाई घटना थी। जब जनरल डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हज़ारों लोगों को घायल कर दिया था। यही वह घटना थी जिसने भगत सिंह और उधम सिंह जैसे, क्रांतीकारियों को जन्म दिया। अहिंसा के पुजारी हों या हिंसात्मक विचारक क्रान्तिकारी, सभी का ह्रदय आजादी की आग से जलने लगा। हर वर्ग भारतमात के चरणों में बलिदान देने को तत्पर था।

अतः 26 जनवरी को उन सभी देशभक्तों को श्रद्धा सुमन अपिर्त करते हुए, गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व भारतवर्ष के कोने-कोने में बड़े उत्साह तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रति वर्ष इस दिन प्रभात फेरियां निकाली जाती है। भारत की राजधानी दिल्ली समेत प्रत्येक राज्य तथा विदेषों के भारतीय राजदूतावासों में भी यह त्योहार उल्लास व गर्व से मनाया जाता है।

26 जनवरी का मुख्य समारोह भारत की राजधानी दिल्ली में भव्यता के साथ मनाते हैं। देश के विभिन्न भागों से असंख्य व्यक्ति इस समारोह की शोभा देखने के लिये आते हैं। हमारे सुरक्षा प्रहरी परेड निकाल कर, अपनी आधुनिक सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हैं तथा सुरक्षा में सक्षम हैं, इस बात का हमें विश्वास दिलाते हैं। परेड विजय चौक से प्रारम्भ होकर राजपथ एवं दिल्ली के अनेक क्षेत्रों से गुजरती हुयी लाल किले पर जाकर समाप्त हो जाती है। परेड शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री ‘अमर जवान ज्योति’ पर शहीदों को श्रंद्धांजलि अर्पित करते हैं। राष्ट्रपति अपने अंगरक्षकों के साथ 14 घोड़ों की बग्घी में बैठकर इंडिया गेट पर आते हैं, जहाँ प्रधानमंत्री उनका स्वागत करते हैं। राष्ट्रीय धुन के साथ ध्वजारोहण करते हैं, उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है, हवाई जहाजों द्वारा पुष्पवर्षा की जाती है। आकाश में तिरंगे गुब्बारे और सफेद कबूतर छोड़े जाते हैं। जल, थल, वायु तीनों सेनाओं की टुकडि़यां, बैंडो की धुनों पर मार्च करती हैं। पुलिस के जवान, विभिन्न प्रकार के अस्त्र-षस्त्रों, मिसाइलों, टैंको, वायुयानो आदि का प्रदर्षन करते हुए देश के राष्ट्रपति को सलामी देते हैं। सैनिकों का सीना तानकर अपनी साफ-सुथरी वेषभूषा में कदम से कदम मिलाकर चलने का दृष्य बड़ा मनोहारी होता है। यह भव्य दृष्य को देखकर मन में राष्ट्र के प्रति भक्ति तथा ह्रदय में उत्साह का संचार होता है। स्कूल, कॉलेज की छात्र-छात्राएं, एन.सी.सी. की वेशभूषा में सुसज्जित कदम से कदम मिलाकर चलते हुए यह विश्वास उत्पन्न करते हैं कि हमारी दूसरी सुरक्षा पंक्ति अपने कर्तव्य से भलीभांति परिचित हैं। मिलेट्री तथा स्कूलों के अनेक बैंड सारे वातावरण को देशभक्ति तथा राष्ट्र-प्रेम की भावना से गुंजायमान करते हैं। विभिन्न राज्यों की झांकियां वहाँ के सांस्कृतिक जीवन, वेषभूषा, रीति-रिवाजों, औद्योगिक तथा सामाजिक क्षेत्र में आये परिवर्तनों का चित्र प्रस्तुत करती हैं। अनेकता में एकता का ये परिदृष्य अति प्रेरणादायी होता है। गणतन्त्र दिवस की संध्या पर राष्ट्रपति भवन, संसद भवन तथा अन्य सरकारी कार्यालयों पर रौशनी की जाती है।

26 जनवरी का पर्व देशभक्तों के त्याग, तपस्या और बलिदान की अमर कहानी समेटे हुए है। प्रत्येक भारतीय को अपने देश की आजादी प्यारी थी। भारत की भूमि पर पग-पग में उत्सर्ग और शौर्य का इतिहास अंकित है। किसी ने सच ही कहा है- “कण-कण में सोया शहीद, पत्थर-पत्थर इतिहास है।“ ऐसे ही अनेक देशभक्तों की शहादत का परिणाम है, हमारा गणतान्त्रिक देश भारत।

26 जनवरी का पावन पर्व आज भी हर दिल में राष्ट्रीय भावना की मशाल को प्रज्वलित कर रहा है। लहराता हुआ तिरंगा रोम-रोम में जोश का संचार कर रहा है, चहुँओर खुशियों की सौगात है। हम सब मिलकर उन सभी अमर बलिदानियों को अपनी भावांजली से नमन करें, वंदन करें।

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26 January 2017 Republic Day Speech in Marathi Language
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Republic Day 2017 Speech in Marathi Language

26 january prajasattak din speech in marathi
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हाय माझ्या प्रिय बंधूंनो, आणि बहिणींना

आम्ही गेल्या 68 वर्षे आपल्या महान देशात प्रजासत्ताक दिन साजरा करत आहे. हे आमच्या 68th प्रजासत्ताक दिन आहे. मी या शुभ प्रसंगी तुम्ही फार उबदार शुभेच्छा पाठविणे.

26 जानेवारी 1950- आम्ही सार्वभौम, धर्मनिरपेक्ष, लोकशाही प्रजासत्ताक राष्ट्र म्हणून आणि आमच्या देशाच्या संविधान लागू झाला ज्या दिवशी होते. आमच्या प्रजासत्ताक दिन 26 जानेवारी निवड मागे एक कारण आहे. 1930 मध्ये, आमच्या राष्ट्रीय नेते राय नदीच्या भारतीय तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज फडकावला. लोक आमच्या देशाच्या स्वातंत्र्य दिन म्हणून 26 जानेवारी देखणे सांगितले होते. आम्ही 1947 मध्ये स्वातंत्र्य मिळाले तेव्हा, हे महत्त्वाचे दिवस महत्त्व नाहीसे करण्यास सुरुवात केली. त्यामुळे आमच्या राष्ट्रीय नेते 1930 च्या पूर्णा स्वराज घोषणा सन्मान करण्यासाठी 26 जानेवारी निवडा, आमच्या स्वातंत्र्य चळवळ आणि स्वातंत्र्य सैनिक.

जानेवारी 26 भारतीय 62 व्या प्रजासत्ताक दिन आहे. या पीक वेळ, आम्हाला 21 व्या शतकातील आधुनिक भारत जुन्या परदेशी आक्रमण भारत त्वरित मोकळा द्या.

भारत ब्रिटिश गलिच्छ हात पासून स्वतंत्र झाला तेव्हा, आपल्या देशात आणि नेते करण्यासाठी खूप होते. आपल्या देशात एक नरक होते. लोक काहीही आणि सर्वकाही एकमेकांच्या विरोधात लढले. पण शक्ती आणि आपल्या राष्ट्रीय नेते यांच्या नेतृत्वाखाली सह, सर्वकाही पुसले होते. भारतात प्रजासत्ताक राज्य झाले. लोकशाही आणि भारतीय संविधान लागू झाला. तरीही आम्ही जगातील सर्वात मोठी लोकशाही आहे.

पण, स्वातंत्र्य आणि लोकशाही नेहमी शांतता खात्री नाही. आम्ही आमच्या देशात दहशतवादी हल्ले आणि उपक्रम स्टॅकिंग हृदय साक्ष आहे. दहशतवाद आणि दहशतवादी आमच्या अमूल्य नागरिकांच्या आयुष्यात घेऊन गेले आहेत. अलीकडील ताज Hotel हे हल्ला त्याच्या प्रकारची darkest होता. आम्ही स्वतंत्र, मुक्त आणि प्रजासत्ताक, जरी, आम्ही अद्याप मुख्य प्रवाहात आपल्या देशात आणण्यासाठी आहे की नकारात्मक सैन्याने या प्रकारच्या मुक्त नाहीत. आम्ही परदेशी विरुद्ध लढाई आमच्या महान grandfathers आपल्या महान देशात या घटक दूर करण्यासाठी या सैन्याने विरुद्ध लढले पाहिजे.

या 21 व्या शतकातील आहे. ते हे करू शकता म्हणून प्रत्येक देशात जलद चालत आहे. मानवी संसाधने 100 पेक्षा जास्त कोटी आम्ही अजूनही विकसनशील आहे. हे लक्षात ठेवा एक वाईट गोष्ट आहे. आम्ही जपान सारख्या इतर देशांतून बोध घेण्याची गरज आहे. मी प्रत्येक भारतीय भविष्यात आमच्या देशातील महान रन / स्वत: स्वत: योगदान विनंती. We- उद्या च्या पिढी, जाणून घेण्यासाठी आणि व्यवस्थित काम केले तर आपण आमच्या माजी President एपीजे अब्दुल कलाम, दृष्टान्त खरा करू शकता.

गरीबी, निरक्षरता, या मुख्य प्रवाहात दूर आपल्या देशात खेचून तीन घटक आहेत unemployment-. तरीही आम्ही जीवन मूलभूत गरजा न आमच्या लोकसंख्येच्या एक भाग आहे. हे घडू नये. आमच्या सरकार आणि इतर गैर-सरकारी संस्थाकडून या विषयावर लक्ष केंद्रित करणे आवश्यक आहे. आमच्या आयटी रचना जगातील कोणत्याही देशापेक्षा चांगले भरभराट तरी, आम्ही कोणतेही काम ग्रस्त एक चांगला लोकसंख्या आहे. निरक्षरता या बेकारी मागे मुख्य तथ्य आहे. शिक्षण समृद्धी आणि आनंद सहजतेने धावा जेथे आमचा एक विकसित देश होईल येत्या काही वर्षांत आमच्या देशाच्या बोधवाक्य असावे.

आपल्या देशात प्रत्येक फॉर्म महान विविधता एक प्रतीक आहे. वेळ असेल तर जास्त वेगाने चालू आहे. पण तरीही आम्ही गेल्या 67 वर्षांपासून आमच्या अंत: बंद हा अंक धरा. मी एकीची भावना भव्य भविष्य आमच्या चळवळ प्रत्येक भारतीय हृदय राहतो इच्छा.

जय हिंद … Jai Hind




Republic Day Speech in Marathi Font

So how was the speech? Inspiration of course!! If want to get stuffs like this, you should bookmarks this website. In upcoming days I’ll publish more articles related to Happy Republic Day 2017. So stay tuned with us.

Jai Hind! Jai Bharat!

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